"संघर्ष की लौ - संजय कुमार की कहानी"
काँटों से भरी थी राह मेरी,
पर हौसले की ढाल थी साथ मेरी।
हर सुबह सूरज से पहले उठता था,
सपनों के पीछे हर दिन जूझता था।
नाम संजय कुमार, पर पहचान नहीं थी,
मन में आग थी, पर उड़ान नहीं थी।
ट्यूशन पढ़ा-पढ़ा कर रातें गुज़ारी,
किताबों से दोस्ती, उम्मीदें सारी।
गाँव की गलियों से निकला अकेला,
हर ठोकर ने बना दिया मुझे और मजबूत ढेला।
खाली जेब थी, पर हौसले करोड़ों के थे,
जैसे अंधेरे में भी सूरज के छोरों के थे।
कभी लोगों ने ताने मारे, कभी हंसी उड़ाई,
पर मैंने हर शब्द को शक्ति में बदल डाली।
मेहनत का हर कतरा मेरा गुरुर बना,
हर असफलता मेरी मंज़िल का सुरूर बना।
मैंने खुद से वादा किया था,
थकूंगा नहीं, जब तक मुक़ाम न किया पाया।
आज जब लोग कहते हैं – “वो संजय कुमार देखो, वो आविष्कारक है!”
तो आँखें भर आती हैं, ये सोचकर – "हाँ, मैं वही हूं जो कभी ख्वाब में था!"
"संघर्ष मेरा साथी रहा, मेहनत मेरा धर्म।
संजय कुमार की कहानी, हर दिल में जगे जोश और कर्म।"
Written By Sanjay Kumar
Instagram I'd- sanjaykumarinventor
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